अंदर की बात

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Thursday, 24 October 2019

मेरा पहला प्यार A True Love Story


मेरी शादी को आज पूरे 3 साल हो चुके है और हम सब अपने जीवन मे बहुत खुश है। लेकिन आज भी मुझे याद वो मेरा पहला प्यार जब मैं आठवी क्लास में पढ़ा करता था। मेरी ही क्लास में पढ़ा करती थी वो। सोनिया नाम था उसका। दिखने में बिल्कुल परी लगती थी। छोटी छोटी आंखे ओर प्यारी सी आवाज थी उसकी। वो हमेशा क्लास में पहले बैंच पर बैठती थी और मैं हमेशा लास्ट बैंच पर बैठता था।

मन ही मन उसे चाहता था मैं। मेरा पहला प्यार थी वो। उससे प्यार करने का एक फायदा मुझे हुआ था कि अब मैं भी लास्ट बैंच को छोडकर सोनिया के पीछे वाले बैंच पर बैठने लगा था ओर साथ मे पढ़ने भी लगा था क्योंकि सोनिया हमारी क्लास की सबसे होशियार स्टूडेंट थी। आप सब को मालूम है कि एक होनहार स्टूडेंट किसी डिफाल्टर स्टूडेंट से बात तक नही करता है। इसलिए उससे बात करने के लालच में मैंने भी पढ़ना शुरू कर दिया।



रोजाना स्कूल जाने लगा। मेरे माँ बाप को लगा कि मैं सुधर गया हूँ लेकिन उन्हें क्या मालूम कि उनके बेटा किसी लड़की पर अपना दिल हार चुका है। अब जैसे कि मैं भी पढ़ने लगा था तो मेरी सोनिया से पढ़ाई को लेकर कभी कभी छोटी मोटी बात हो जाया करती थी। मेरा प्यार उसको लेकर बढ़ता ही जा रहा था लेकिन मैं कभी उससे इज़हार ना कर पाया।

अब हम दसवीं क्लास में आ चुके थे। मैं अभी भी उसे बहुत चाहता था। हमारा स्कूल दसवीं क्लास तक ही था। इसलिए अब मुझे हमेशा यही डर लगा रहता था कि अब हम अलग हो जाएंगे और अब मैं सोनिया को कभी भी नही देख पाऊंगा। दिन गुजरते गए और आखिर वो दिन भी आ गया जब हम दोनों को वो स्कूल छोड़ना था और हम एक दूसरे से बहुत दूर जाने वाले थे।

सोनिया एक अमीर खानदान की लड़की थी। उसके पापा एक सरकारी स्कूल में टीचर थे। उनका तबादला कुछ सालों बाद अलग शहर में हो जाया करता था। अब हम दोनों ने दसवीं भी पास कर ली थी। सोनिया के पापा अब अपने परिवार के साथ किसी दूसरे शहर में चले गए थे ओर मेरे परिवार ने भी मुझे आगे की पढ़ाई के लिए बड़े स्कूल जो हमारे शहर से दूर दूसरे शहर में था वहां भेज दिया।



लेकिन इस बीच मैंने जब हम सब दसवीं क्लास का रिजल्ट द3कह रहे थे तब मैंने चुपके से सोनिया का आइडेंटिटी कार्ड जिस पर सोनिया की फ़ोटो लगी हुई थी। वो मैंने उसके बैग से निकाल लिया था। ताकि जब हम दूर होंगे तो मैं उसकी ये फोटो देख कर अपने दिल को तसल्ली दे दिया करूँगा।

5 साल बाद मैंने डिप्लोमा कर लिया था। और मेरी अच्छी नोकरी भी लग गयी थी। अब मेरे परिवार वालो ने मेरी शादी करनी चाही थी लेकिन मैं केवल सोनिया से प्यार करता था और मुझे ये भी मालूम था कि मैं उससे कभी मिल नही पाऊंगा। मेरे परिवार वालो ने मेरे लिए लड़की पसंद कर ली थी और किस्मत से उसका नाम भी सोनिया था।

मैं अपने परिवार के विरुद्ध नही जा सकता था तो मैंने शादी के लिए हां भी कर दी थी। अब मेरी शादी हो चुकी थी। शादी केएक साल बाद मुझे किसी काम से बाहर जाना था। तो मैं जल्दी जल्दी में अपना सामान पैक कर रहा था। तभी मुझे दसवीं क्लास का सोनिया का आइडेंटिटी कार्ड मिला। सोनिया की फ़ोटो देखते ही मेरे दिल में दबा प्यार बाहर आ गया। लेकिन ये कार्ड मेरी बीवी ना देख ले इसलिए जल्दी से उस कार्ड को छुपाने लगा।



लेकिन तभी मेरी बीवी अंदर आ गयी और उसने वो कार्ड देख लिया। मैं थोड़ा घबरा गया था ये सोचकर कि अब वो बहुत सारे सवाल पूछेगी की ये कौन है , इसका कार्ड तुम्हारे पास कैसे आया। लेकिन जैसे ही उसने कार्ड देखा तो वो एक दम से हैरान होकर बोली कि ये कार्ड तुम्हारे पास कैसे आया क्योकि ये कार्ड तो उसका है जो दसवीं क्लास में उससे खो गया था।

तब मैंने उसे बोला कि ये मेरे कार्ड तो मेरी दोस्त का है तब मेरी बीवी ने अपनी पुरानी बचपन की डायरी दिखाई जिसमे उसकी बचपन की बहुत सारी फ़ोटो थी। तब मैने इसे बताया कि ये मैंने उसके बैग से चुरा लिया था क्योंकि मैं उससे बहुत प्यार करता था। इतना कहते ही उसने मेरी बात बीच मे काट दी और मेरे सीने से लग गयी। मैं भी बहुत खुश था क्योकि जिसे मैंने बचपन मे चाहा था आज वो मेरी बीवी थी। और वो भी खुश थी क्योंकि उसे बचपन से प्यार करने वाला पति मिला था। 

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