अंदर की बात

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Sunday, 1 July 2018

बारिश (एक अधूरी प्रेम कहानी)


आज फिर से आकाश में बादल छाए हुए है। बाहर ठंडी ठंडी हवा चल रही है। बारिश होने वाली है। आज फिर से मन मे उथल पुथल हो रही है। आखिर हो भी क्यो नही, बारिश हमे इतनी पसंद जो थी।
मेरी प्रेम कहानी

मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है वो दिन, जब वो पहली बार रीना के साथ हमारे घर पर आया था। रीना मेरी मौसी की लड़की, जब भी स्कूल की छुट्टियां होती थी हमारे ही घर मे बिताती थी। इस बार उसका दोस्त राहुल भी उसके साथ हमारे घर आया था। पहली बार उसे देखा तो कुछ अजीब सा लगा। रीना और राहुल अपने कमरे में समान रखने चले गए।

उसकी यादें अभी जहन में घूम ही रही थी कि अंदर कमरे से छोटी की आवाज आती है । मम्मी बारिश तेज हो गयी है। छोटी मेरी 7 साल की बच्ची है। छत पर कपड़े सूखने रख के आयी थी जल्दी से वो उतारने है।  अभी छत पर गयी ही थी कि बारिश की बूंदों ने जैसे ही मुझे छुआ फिर से उसकी यादें जाग गयी। ।


दूसरा दिन था तेज बारिश हो रही थी । आफिस से आते आते रास्ते मे पूरी भीग गयी थी। जैसे ही घर की डोर बैल बजाई तो राहुल ने दरवाजा खोला. मैं फटाफट अपने कमरे में चली गयी. जब कपडे बदलकर बहार आयी तो राहुल ने बताया की रीना और मम्मी बाजार में गए है. राहुल घर पर अकेला था. मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था. बारिश में भीग कर आयी थी तो मुझे ठण्ड भी लग रही थी. जिसे राहुल ने महसूस कर लिया था.

मैं अपने कमरे में बैठी हुई थी की मेरे कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया. बाहर से राहुल की आवाज आयी बोला की मैंने चाय बना दी है . आप बाहर आकर पि लीजिये. हम दोनों बाहर आँगन में बैठ कर चाय पि रहे थे और बाहर बारिश ने अपना रुख तेज कर लिया था. राहुल ने बताया की वी रीना की क्लास में ही पड़ता है और काफी अच्छे दोस्त है. फिर हम बाते करने लगे. अब वो मुझे अच्छा लगने लगा था.

बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. राहुल मुझसे पूछने लगा की आपको बारिश पसंद है. तो ना जाने क्यों मैंने हाँ में सर हिला दिया. तो वो मेरा हाथ पकड़ कर ऊपर छत पर ले गया. और उसे मैं कुछ बोल भी ना पायी. मेरा दिल की धड़कने तेज हो रही थी. हम दोनों छत पर बारिश का मजा ले रहे थे.


इतने में ही घर की डोर बेल बजी.  तो मालूम हुआ की मम्मी और रीना बाजार से आ गए है. वो भी बारिश के कारण पूरा भीग गए थे. फिर मैंने उन्हें चाय बना कर दी. रात के 8 बज चुके थे. खाने की भी तयारी करनी थी. अब बारिश बंद हो चुकी थी. रात का खाना खाने के बाद मैं, रीना और राहुल बाहर घूमने निकल पड़े. हमने बहुत मस्ती की . अब मैं और राहुल अच्छे दोस्त बन चुके थे लेकिन शायद मेरे दिल में और कुछ ही चल रहा था.

मुझे ऐसा लगा की किसी ने मेरा हाथ पकड़ा है. मुड़ कर देखा तो छोटी थी. मम्मी सारे कपडे भीग गए है. तब होश संभाला और फटाफट सारे कपडे निचे ले गयी. मैं भी भीग चुकी थी. अब मुझे बारिश अच्छी नहीं लगती थी. लेकिन फिर बह ना जाने क्यों बारिश के आते ही उसकी यादे मेरे जहन में उठ जाती थी.



अब रीना की छुट्ठियाँ ख़तम हो चुकी थी. आज रीना और राहुल दोनों वापस अपने शहर जाने वाले थे. इन दिनों के बिच जो कुछ भी हुआ वो मेरे लिए सबसे यादगार लम्हे थे. जाने से पहले राहुल और रीना को मैंने बोला की आते रहना. राहुल ने एक छोटी से स्माइल करते हुए हां जरूर बोल दिया. लेकिन सच तो ये है की उस दिन के बाद राहुल और मैं कभी नहीं मिले.

उस बात को 8 साल बीत गए है. अब तो बस छोटी की आँखों में ही राहुल को देख लिया करती हूँ. छोटी लगती भी तो राहुल के जैसी ही है. आँख , नाक, होंठ, सब राहुल के जैसे ही है. जब भी कोई पुराना लम्हा याद आता है तो छोटी को अपने सीने से लगा कर रो लिया करती हूँ.

तो दोस्तों, कैसे लगी आपको मेरी ये कहानी. कृपया करके कमेंट जरूर करे और अगर आपको अच्छी लगी है तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर जरूर करे. धन्यवाद

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